श्री राम चरित मानस

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गोस्वामी तुलसीदास रचित श्री रामचरित मानस भारतीय संस्कृति मे एक विशेष स्थान रखती है। वैसे तो श्री रामचरित मानस के बहुत सारे संस्करण इन्टरनैट पर दिख जायेंगे, परन्तु यूनिकोड का संस्करण उपलब्ध ना होने के कारण मैने इसके संकलन का एक छोटा सा प्रयास किया है।
समर्पित : विश्व भर के सभी श्री रामचरित मानस प्रेमियो को।
साभार : श्री रवि रतलामी, श्री अनूप शुक्ला, जिनके भागीरथी प्रयासो से यह महान कार्य सम्पन्न हो सका। मै उनका हृदय से आभारी हूँ।
आप सभी के सुझाव एवं आलोचनाए सादर आमन्त्रित है। यहाँ पर टिप्पणी के रुप मे लिखें अथवा मुझे jitu9968 at gmail dot com पर इमेल करें।
निवेदक : जीतेन्द्र चौधरी
कापीराइट :इस संकलन पर मेरा या मेरे किसी भी साथी संकलनकर्ता का किसी भी तरह का कापीराइट नही है।
अपडेट : पाठकों के विशेष निवेदन पर सम्पूर्ण रामायण, इबुक के रुप में, डाउनलोड के लिए भी उपलब्ध है।



July 24, 2006 at 10:03 am
सुझाव:
१) तुलसीदास जी का नाम मुख्यपृष्ठ पर कहीं नही है…
२)क्या इसका Printer Friendly Version भी बनाया जा सकता है?
July 24, 2006 at 10:04 am
इस पुनीत कार्य के लिये आप सबको बधाई..
July 24, 2006 at 10:17 am
नितिन भाई, भूल की ओर इंगित करने के लिये धन्यवाद, भूल सुधार कर दिया गया है।
July 24, 2006 at 10:29 am
इसी प्रकार श्री मदभगवतगीता का PDF संस्करण गीताप्रेस गोरखपुर की वेबसाइट पर उपलब्ध है
http://www.gitapress.org
July 24, 2006 at 11:15 am
बहुत-बहुत बधाई। यदि उचित समझें तो हेडर का रंग बदल ले मानस की गरिमा के प्रतिकूल है। पुनः धन्यवाद, इतनी आसानी से बिना किसी तामझाम के मानस का पाठ करने की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु।
July 24, 2006 at 12:00 pm
हमारा इसमें कोई योगदान नहीं है। जो है सो जीतेंद्र का है जिन्होंने पहले सुंदरकाण्ड
टाइप करके डाला। इसके बाद रविरतलामी जी का है जिन्होंने हमें पूरी रामचरित
उपलब्ध कराई। मेरा योगदान खाली इधर की मेल उधर करने का है। लेकिन बहुत खुशी
है रामचरित मानस को यहां देखकर। अब तकनीकी वीरों के लिये चुनौती है कि क्या इसे
वर्ण क्रमानुसार या अन्य तरह से उपलब्ध कराया जा सकता है। जैसे यदि मानों हमें
‘क’ से सारी चौपाइयां दोहे देखने हों तो सब मिल जायें। है कोई जुगत! इस काम के लिये जीतेंद्र बधाई के हकदार हैं शुरुआत करने के लिये तथा रविरतलामी की तारीफ कि उनको जो कमी उसे पूरा करने के लिये सहयोग दिया। हमारा श्रेय केवल इतना है कि महीने भर पहले भेजे रविरतलामी के मेल को दबाये रहे जीतू के आने तक।
July 24, 2006 at 1:06 pm
आप सभी का धन्यवाद.
मैंने भी कोई विशेष कार्य नहीं किया है. जो फ़ाइलें टीडीआईएल तथा विकि पर ISCII तथा आईट्रांस में थीं, और जिनका ऑनलाइन इस्तेमाल संभव नहीं हो पा रहा था, उन्हें कुछ स्वचालित औजारों की मदद से यूनिकोड में परिवर्तित कर एक साथ जोड़ने का ही कार्य किया है.
बहरहाल, यह सुखद अहसास का विषय है कि अंततः रामचरित मानस के पद अब सभी को मात्र एक गूगल खोज की दूरी पर उपलब्ध है.
July 24, 2006 at 1:56 pm
एक सार्थक प्रयास के लिये बधाई और धन्यवाद.
July 24, 2006 at 7:07 pm
बधाई! जबरदस्त, क्या काम किये हो गुरू लोगों छा गये लेकिन इतना टाईप कैसे किये और कब से किये रहे
July 25, 2006 at 3:34 am
इस महान पुण्य कार्य के लिये बधाई!!
July 27, 2006 at 9:50 am
अदभूत!!! तुलसीदास के इंटरनेटिया संस्करण आप तीनों विद्वजनों को सत सत नमन.
July 28, 2006 at 8:08 pm
बढ़िया, चकाचक काम किए हो।
पर जीतू भाई, यह थीम बदल डालो, कोई और लगाओ, यह रोमन लिपि के लिए सही है पर अपनी देवनागरी बहुत महीन दिखाई दे रही है इसमें!!
July 29, 2006 at 9:35 am
बहुत खूब
बधाई ।
आप सब को
आप हो आज के नेटतुलसी
July 31, 2006 at 11:27 am
बहुत ही बढ़िया काम किया है आप तीनों ने। आप सब बधाई के पात्र हैं। मेरे मम्मी-पापा भी पढ़कर बहुत प्रसन्न हुए।
August 1, 2006 at 4:11 pm
रवि जी, अनुप शुकला और जितू भैया - आप तीनों का धन्यवाद - बहुत दिनों से जिसकी तलाश थी वोह हमे आज मिला और वोह युनिकोड मे
एक बार फिर धन्यवाद आप तीनों का (कुरआन तो पूरा पढ लिया अब ये भी पढेंगे
)
August 2, 2006 at 4:46 am
इस अनुपम कार्य के लिए साधुवाद! एक सुझाव मेरी ओर से- एक अध्याय गोसाईं जी के संक्षिप्त जीवन परिचय वाला भी जोड दें.
August 2, 2006 at 4:47 pm
kshama kareN…roman me hindi likhne ke liye… mere priy granth ‘ramcharitmans ko internet par dekh kar bahut prasnnata hui..aapke safal prayas ke liye badhai sweekareN…
August 3, 2006 at 1:48 pm
इसका खोजी यंत्र काम करता हुआ नहीं लग रहा है| यहाँ पर इसकी काफी उपयोगिता है| इसे क्रियाशील किया जाय|
सद्कार्य के लिये सभी महानुभावओं को धन्यवाद|
August 3, 2006 at 6:37 pm
bahoot bahoot badhaai aur dhanybaad.
August 6, 2006 at 12:05 pm
अतिसुन्दर, महत्त्व्पूर्ण एवं जनोपयोगी प्रयास है।
पुनीत कार्य में योगदान करने वाले सभी महानु भावों को नमन।
कुछ सुझाव:
About पृष्ठ पर सामग्री स्थापित की जाये, जो कि Home पृष्ठ से ली जा सकती है।
वाल्मीकि कृत रामायण पर भी प्र्काश डाला जाय।
Categories मे अध्यायों को क्रमवार किया जा सके तो अच्छा लगेग।
धन्यवाद।
August 7, 2006 at 7:54 pm
इतना महान और पुनीत कार्य करने हेतु आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं साधुवाद.आपने सिध्द कर दिया कि आप सब ना सिर्फ़ विलक्ष्ण प्रतिभा के अपितु सोच के भी धनी है.आप सभी का बहुत बहुत बारंबार अभिन्नदन.
August 8, 2006 at 9:10 am
बहुत सराहनीय प्रयास है मित्रों, आप सभी बधाई के पात्र है
-राजेश
August 16, 2006 at 1:45 pm
Heartiest Congratulations ! I am learning to write in Hindi/ Devnagari.
This is the best ever feeling I had in recent days, working in Middle East. This is the best thing ever I can get from Google.
Keep it up Friends…
September 28, 2006 at 8:57 pm
आपके इस भगिरथी प्रयास के लिये बधाई एवं धन्यवाद !!!!!
रीतेश गुप्ता
March 11, 2007 at 4:48 am
Must congratulate you for your “Bhagirath Prayas” of putting Ramcharit manas on internet. I was looking for Vocal Ramcharit Manas. Please take some step in that direction also. If I can be of any help.
May 12, 2007 at 10:12 am
Your effort is commendable . I would request you to increase the font size to largest . This will help many senior citizens to read it . We can make it largest at our end by increasinghte text size but it still is not enough . the text /fonts are very small on this blog.
June 19, 2007 at 6:20 am
रामायण को इण्टरनेट पर देख कर मन मुदित है। बधाई सबको तहेदिल से।
August 2, 2007 at 6:09 am
JAI Shree RAM
Hearties congratulation for this efforts. Keep it up and do let me know if I can contribute in anyway.
I have no word to appreciate this work.
Best Regards
OP Sharma
August 20, 2007 at 10:24 am
इस शुभ कार्य के लिए आप सभी लोग बधाई के पात्र हैं।
August 30, 2007 at 9:09 am
प्रिय भाई,
रामचरितमानस को यहाँ उपलध करा कर राम नाम प्रेमी जानो के ऊपर बहुत बहुत उपकार किया है | इस उपकार के येवज में शब्दों के आलावा कुछ भी नही है आपको देने को.
रामचरिमानस एक धार्मिक ग्रन्थ के आलाबा एक उत्तम नीतिशास्त्र है| इसके पद बहुत ज्ञान देने वाले हाँ और रोचक भी…
येः मेरे जैसे सरे software प्रोफेशनल राम भक्तों, जिनका जीवन सारा समय computer और internet पर गुजरता है, के ऊपर अपके द्वारा क्या गया महान कृत है. अब मेरे श्री राम मेरे पास हाँ मेरे डेस्क पर मेरे साथ ..
साधुवाद और आप जीवन में हमेशा उन्नति पायें .
|| जय श्री राम ||
नीतेश नेमा
September 24, 2007 at 9:22 am
आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा.
ऎसेही लिखेते रहिये.
क्यों न आप अपना ब्लोग ब्लोगअड्डा में शामिल कर के अपने विचार ऒंर लोगों तक पहुंचाते.
जो हमे अच्छा लगे.
वो सबको पता चले.
ऎसा छोटासा प्रयास है.
हमारे इस प्रयास में.
आप भी शामिल हो जाइयॆ.
एक बार ब्लोग अड्डा में आके देखिये.
October 4, 2007 at 4:37 pm
रामचरित मानस का यूनीकोड उपलब्ध कराकर रवि समेत आप तीनों भाई त्रिदेव हो गए हैं। नमन करता हूं आपके इस सार्थक प्रयास को। राम पर पूरे देश में जब विवाद छिड़ा हो और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए हिंदू समाज के पूज्य मर्यादा पुरुषोत्तम पर अभद्र टिप्पणियां की जा रहीं हों, ऐसे आपका यह कार्य दुनिया भर के मानस प्रेमियों को सुकून देने वाला है। कोटिशः धन्यवाद।
डा. मान्धाता सिंह
कोलकाता
December 25, 2007 at 7:07 pm
Heartiest Congratulations for great effort,
GOD SHREE RAN JI SHOWER ALL BLESSING TO YOU & ALL
December 26, 2007 at 4:31 pm
हे तुलसीदास जी के इंटरनेटिआ अवतारो तुम्हें नमल
December 27, 2007 at 2:27 am
आप सभी लोगों को बधाई और धन्यवाद। संग्रहण के इस आधुनिक और आगे सबसे ज्यादा काम आने वाले तरीके पर रामचरित मानस उपलब्ध कराने के लिए।
January 30, 2008 at 12:46 pm
Jai Shri Ram!!
Aap sabhi ke prayaason ko vishesh badhai!!
Ram charitmanas aur Ram naam ka prasaar karne ke liye dhanyawad!!
February 10, 2008 at 7:54 pm
मेरे ख्याल से पुरी रामायण इंटरनेट डाल देने से आपका लक्ष्य पुरा नही हो जाता. इसका अर्थ कोण समझायेगा? किरपा इसे अन्यथा न ले परन्तु मुझे पक्का विश्वास है की किसी ने भी आज तक यह पुरा पेज नही पढ़ा होगा.
इतनी मेहनत के बाद अगर कोई इसे न पढे तो में समझाता हूँ की उद्देश्य पुरा नही हुआ. इसके बाद अगर कोई कदम है तो वह यह की हर छंद के बाद एक लिंक दे जिसमे उस छंद का पुरा वर्णन व व्याख्या हो. हर रोज नई पोस्ट के जरिये हर अध्याय मे लिंक जोड़ते जाए व पोस्ट लिखते जायें. यही बेहतर हल है
maja nahi ayya font mein bhi dikkat hai. hindi mein tippani bhi dahi nahi ho rahi.
February 29, 2008 at 5:56 am
Jay Shree Ram
Aap ne kamaal kar diya. Mai aesi site dekhane ke liye lalayit tha. Ab mujhe purna vishwash ho gaya ki hamari sanskriti vishwa bhar me praphulit hoti rahegi. Nayi pirhi ise aur unchaee par le jayenge. Ramayan aane wale yugo me dharma ka marg dikhata rahega.
Dhanyawad
March 10, 2008 at 7:01 am
jai siya ram
is puneet karya ke liye app sabhi ko badhai
amrit sudha ka pan karane ke liye dhanyabad
D K Sah
Lucknow, India
March 18, 2008 at 9:39 am
thanks a lot for these efforts. Ram charit Manas Audio CD’s are available in Planet M (Pune,Bangalore & Hyderabad ) sung by suresh wadkar , kavita krishnamurthy etc.
April 22, 2008 at 10:41 am
Pl write the Meaning